बहुत से लोग मानते हैं कि वास्तु शास्त्र केवल परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। लेकिन यदि हम कुछ वास्तु सिद्धांतों को आधुनिक मनोविज्ञान (Psychology), व्यवहार विज्ञान (Behavioral Science) और पर्यावरणीय डिज़ाइन (Environmental Design) के दृष्टिकोण से देखें, तो उनके पीछे व्यावहारिक कारण भी दिखाई देते हैं।
आइए जानते हैं ऐसे 3 Scientific Vastu Facts, जिन्हें अपनाकर आप अपने घर का वातावरण अधिक सकारात्मक बना सकते हैं।
घर के किसी भी हिस्से, विशेषकर मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास अनावश्यक सामान या कबाड़ जमा न होने दें।
जब हम घर में प्रवेश करते ही बिखरा हुआ सामान देखते हैं, तो मस्तिष्क को एक साथ अधिक Visual Information Process करनी पड़ती है। कुछ शोध बताते हैं कि अव्यवस्थित वातावरण तनाव की भावना बढ़ा सकता है और Cortisol (Stress Hormone) के स्तर से भी इसका संबंध देखा गया है।
एक साफ़, व्यवस्थित और खुला वातावरण मन को अधिक शांत, व्यवस्थित और सकारात्मक महसूस कराने में सहायता कर सकता है।
वास्तु परंपरा में मुख्य द्वार पर स्वास्तिक लगाना शुभ माना जाता है।
स्वास्तिक भारतीय संस्कृति का एक प्राचीन शुभ प्रतीक है। किसी सकारात्मक प्रतीक को प्रतिदिन देखना व्यक्ति के मन में सकारात्मक भावनाएँ और आशावादी सोच को मजबूत कर सकता है। मनोविज्ञान में इसे Positive Visual Priming जैसी अवधारणाओं से भी जोड़ा जाता है, जहाँ सकारात्मक संकेत हमारी मानसिक अवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
घर में White, Off-White, Cream और अन्य हल्के रंगों का अधिक उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
हल्के रंग कम Visual Clutter उत्पन्न करते हैं और स्थान को अधिक खुला, शांत एवं व्यवस्थित महसूस कराते हैं। Interior Psychology के अनुसार Soft Neutral Colours मानसिक आराम, एकाग्रता और शांति का अनुभव बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
वास्तु का उद्देश्य केवल दिशाओं का पालन करना नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण बनाना भी है जहाँ व्यक्ति स्वयं को अधिक शांत, संतुलित और सकारात्मक महसूस करे।
हालाँकि, हर घर की संरचना अलग होती है। इसलिए किसी भी बड़े निर्णय से पहले घर का संपूर्ण Astro-Vastu Analysis करवाना अधिक उचित रहता है।
Astrosahinta Divine Spaces में हम पारंपरिक वास्तु सिद्धांतों के साथ व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाकर बिना तोड़-फोड़ के Vastu Solutions प्रदान करते हैं।